मुंबई | बॉम्बे हाईकोर्ट ने अभिनेता से राजनेता बने शत्रुघ्न सिन्हा के पक्ष में अहम फैसला सुनाते हुए उनके ‘व्यक्तित्व अधिकार’ को कानूनी संरक्षण दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि उनकी अनुमति के बिना उनके नाम, तस्वीर, आवाज या उनके चर्चित संवाद—जैसे “खामोश”—का इस्तेमाल अब गैरकानूनी माना जाएगा।
अदालत की प्रमुख टिप्पणियां
अंदाज और पहचान को संरक्षण:
न्यायमूर्ति शर्मिला देशमुख की एकल पीठ ने माना कि “खामोश” शब्द और सिन्हा की खास बोलने की शैली उनकी विशिष्ट पहचान का हिस्सा है। किसी भी व्यक्ति या संस्था को व्यावसायिक लाभ के लिए इसका दुरुपयोग करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए निर्देश:
अदालत ने सोशल मीडिया मंचों, ई-कॉमर्स साइट्स और एआई टूल्स संचालित करने वाली इकाइयों को निर्देश दिया कि वे सिन्हा की पहचान से जुड़ी अनधिकृत सामग्री तुरंत हटाएं।
व्यावसायिक उपयोग पर रोक:
अब कोई भी कंपनी उनकी छवि, नाम या अंदाज का उपयोग कर टी-शर्ट, पोस्टर, विज्ञापन या मिमिक्री आधारित सामग्री बेचकर लाभ नहीं कमा सकेगी।
फैसले का महत्व
यह आदेश केवल शत्रुघ्न सिन्हा तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत में ‘पब्लिसिटी राइट्स’ और ‘प्राइवेसी’ की कानूनी सीमाओं को भी स्पष्ट करता है। इससे पहले अमिताभ बच्चन और अनिल कपूर को भी इसी तरह का संरक्षण मिल चुका है। अदालत ने दोहराया कि किसी भी सेलिब्रिटी की प्रतिष्ठा और पहचान का उपयोग उनकी सहमति के बिना व्यावसायिक उद्देश्य से नहीं किया जा सकता।
