Kolkata | प्रकृति

एनजीटी ने घोरमारा द्वीप बचाने का दिया आदेश

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने सुंदरबन में तेजी से हो रहे तटीय कटाव पर जताई चिंता

 

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के घोरमारा द्वीप का सिकुड़ना गंभीर चिंता का विषय बन गया है| एक समाचार रिपोर्ट के अनुमान अनुसार  2042 तक घोरमारा का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा खत्म हो सकता है। इस रिपोर्ट पर स्वत: संज्ञान लेते हुए, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट कहा कि इसके लिए दीर्घकालिक और बड़े संरक्षण योजना बना कर अमल में लाने की जरुरत है | तात्कालिक और विभिन्न टुकड़ों में किए जाने वाले उपाय इस गंभीर पर्यावरणीय संकट का समाधान नहीं बन सकते | 

जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के आंकड़ों के अनुसार 1969 से 2019 के बीच भारतीय सुंदरबन में 250 वर्ग किलोमीटर से अधिक भूमि समुद्र में समा चुकी है|  जबकि घोरमारा द्वीप का क्षेत्रफल इसी अवधि में 8.59 वर्ग किमी से घटकर 3.83 वर्ग किमी रह गया है| 

बताया जा रहा है कि गंगा डेल्टा क्षेत्र प्राकृतिक भौगोलिक बदलावों, समुद्र-स्तर में वृद्धि, बार-बार आने वाले चक्रवातों और ऊपरी इलाकों में बांधों के कारण गाद की कमी जैसी वजहों से भारी कटाव झेल रहा है|  

 इसके मद्देनजर ट्रिब्यूनल ने वन महानिदेशक (भुवनेश्वर क्षेत्रीय कार्यालय) और पश्चिम बंगाल के प्रधान मुख्य वन संरक्षक की संयुक्त समिति गठित की है, जिसे मैंग्रोव संरक्षण, कटाव-नियंत्रण, विस्तृत कार्ययोजना, अनुमानित लागत, एजेंसियों की जिम्मेदारी और समयसीमा तय करके तीन महीने में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है. मामले की अगली सुनवाई 28 मई 2026 को होगी