बिना इजाजत लोन थोपने पर बिलासपुर हाईकोर्ट नाराज, बैंकों और रिकवरी एजेंटों पर लगाम
बिलासपुर।हाईकोर्ट ने बिना ग्राहक की मंजूरी पर्सनल लोन पास करने वाले मामलों पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने दो अलग-अलग पीड़ितों की याचिका पर सुनवाई करते हुए बैंकों और रिकवरी एजेंटों को अगली तारीख तक किसी तरह की वसूली या कार्रवाई न करने के आदेश दिए हैं।
OTP लेकर कई बैंक से पास करा दिए लोन
दोनों याचिकाओं में आरोप है कि लोन दिलाने के नाम पर एजेंटों ने दस्तावेज और OTP ले लिए। इसके बाद याचिकाकर्ताओं की सहमति के बिना अलग-अलग फाइनेंस कंपनियों से मोटी रकम के लोन स्वीकृत करवा दिए गए।
पहला मामला: सिम्स की स्टाफ नर्स
सिम्स में पदस्थ वर्षा बेक का कहना है कि अप्रैल 2023 में स्पैश एडवाइजर के एजेंट मनोज भगत ने फोन कर लोन का झांसा दिया। उन्होंने सिर्फ आदित्य बिड़ला से 5.40 लाख लेने की हामी भरी थी।
आरोप है कि इसके बाद उनके नाम पर 46.20 लाख रुपये तक के कई लोन निकाल दिए गए। जब उन्होंने विरोध किया तो एजेंट ने लोन राशि का 50% अपने खाते में डालने और EMI भरने का वादा किया। शुरू में एजेंट ने EMI जमा किया, मगर बाद में उसने लोन पटना बंद कर दिया और संपर्क तोड़ दिया। फिर रिकवरी एजेंट घर-परिवार को परेशान करने लगे।
दूसरा मामला: आयुर्वेद कॉलेज का कर्मचारी
हरि लाल पोया ने बताया कि सितंबर 2023 में एजेंट पूजा यादव ने लोन दिलाने की बात कही। उन्होंने केवल चोला मंडलम से 5 लाख लेने की सहमति दी थी। लेकिन बिना पूछे 95.31 लाख रुपये के लोन अलग-अलग संस्थानों से पास हो गए।
कोर्ट का अंतरिम आदेश
न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की अदालत ने दोनों मामलों में बैंकों और एजेंटों को दंडात्मक कार्रवाई से रोक दिया। कोर्ट ने सभी पक्षों को 2 हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा है।
अब बैंकों और फाइनेंस कंपनियों का पक्ष आने के बाद तय होगा कि बिना सहमति हुए लोन और वसूली को लेकर आगे क्या रुख अपनाया जाएगा।