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65₹ की नौकरी से AGM की कुर्सी तक प्रतीक्षा तोंडवलकर की बेमिसाल कहानी

नई दिल्‍ली। प्रतीक्षा टोंडवलकर की कहानी किसी फिल्‍मी स्‍क्रिप्‍ट से कम नहीं है। वह मुंबई की रहने वाली हैं। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) में कभी उन्‍होंने सफाईकर्मी के तौर पर काम किया। टॉयलेट और बैंक के फर्नीचर की सफाई की। सिर्फ 65 रुपये महीने की पगार पर वह ये सभी काम करती थीं। फिर आगे चलकर उसी बैंक में प्रतीक्षा असिस्टेंट जनरल मैनेजर (AGM) बन गईं। 17 साल की उम्र में शादी। फिर 20 साल की उम्र में पति का सिर पर से साया उठ जाने तक, उन्‍होंने अपनी जिंदगी में बहुत कुछ देखा और सहा है। जिस मुकाम तक प्रतीक्षा आज पहुंची हैं, वह उनकी कड़ी मेहनत और लगन के कारण मुमकिन हुआ। प्रतीक्षा टोंडवलकर की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं।

एसबीआई (SBI) में सफाईकर्मी के पद पर नौकरी करती थी प्रतीक्षा



17 साल की उम्र में शादी

 

प्रतीक्षा की शादी 17 साल की उम्र में सदाशिव कडू से हो गई थी। माता-पिता की आर्थिक तंगी के कारण वह अपनी 10वीं कक्षा की परीक्षा भी पूरी नहीं कर पाई थीं। सदाशिव मुंबई में एसबीआई में बुकबाइंडर के तौर पर काम करते थे। दुख की बात यह है कि जब यह जोड़ा अपने गांव जा रहा था, तभी एक दुर्घटना में सदाशिव की मौत हो गई। इससे 20 साल की उम्र में ही प्रतीक्षा को अपने गुजारे के लिए संघर्ष करना पड़ा।



एसबीआई में सफाईकर्मी का किया काम

 

शिक्षा की कमी के कारण प्रतीक्षा के लिए ठीक-ठाक नौकरी खोजना काफी मुश्किल था। परिवार का पेट पालने और अपनी हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के लिए उन्हें एसबीआई में सफाईकर्मी (Sweaper) के तौर पर काम करने पर मजबूर होना पड़ा। टॉयलेट और बैंक के फर्नीचर की सफाई करके वह महीने के लगभग 60-65 रुपये कमाती थीं। साथ ही अपने बेटे की देखभाल करती थीं। यही नहीं, दूसरे छोटे-मोटे काम भी करती थीं। प्रतीक्षा ने दिन-रात एक कर दिया और अपने बेटे का पेट पालने के लिए अपनी क्षमता से कहीं ज्‍यादा मेहनत की।



ग्रेजुएशन करके बनीं क्‍लर्क

 

हर बड़ी उपलब्धि के पीछे संघर्ष और जीत के कई पड़ाव होते हैं। प्रतीक्षा की कहानी भी इससे अलग नहीं थी। मुश्किल समय में जब ऐसा लगता था कि सब कुछ उनके खिलाफ है, तब भी प्रतीक्षा ने कोई शिकायत या रोना-धोना नहीं किया। वह जानती थीं कि जो लोग हार मान लेते हैं और निराशा को हावी होने देते हैं, उन्हें कभी कोई हल नहीं मिलता। ऐसे में बेहतर यही है कि वह खुद ही कोई रास्ता निकालें। उन्‍होंने पढ़ाई करने का फैसला किया। मुंबई के विक्रोली में एक नाइट कॉलेज में दाखिला लिया। 12वीं की परीक्षा पास की। फिर एक दूसरे नाइट कॉलेज से मनोविज्ञान (साइकॉलजी) में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई के क्रम में उन्‍हें सफाईकर्मी से प्रमोट करके पहले मैसेंजर बनाया गया। जब उन्होंने ग्रेजुएशन पूरा कर लिया तो बैंक में क्लर्क कम कैशियर बना दिया गया।



फिर लगाई ऊंची छलांग

 

प्रतीक्षा ने साल 1993 में दूसरी शादी की। उनके पति प्रमोद टोंडवलकर बहुत ही सहयोगी स्वभाव के थे। उन्होंने प्रतीक्षा को बैंक में प्रोमोशन के लिए परीक्षाएं देने के लिए प्रोत्साहित किया। प्रतीक्षा ने हालात का रुख ही बदल दिया। स्थिति में एक बड़ा बदलाव ला दिया। उन्‍होंने पूरी जान लगाकर काम किया। अपने काम में जबरदस्त प्रदर्शन किया। अपनी लगन और कड़ी मेहनत की बदौलत प्रतीक्षा तरक्की करके 'ट्रेनी ऑफिसर' के पद तक पहुंच गईं। बाद में वह 'डीजीएम' और फिर 'एजीएम' के पद तक पहुंचीं। उनकी सफलता का सफर आज लाखों लोगों को प्रेरित करता है।