कोरिया। कोरिया जिले में वर्ष 2016 बैच की आईएएस अधिकारी रोक्तिमा यादव ने 20वीं कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी के रूप में पदभार ग्रहण कर लिया है. उनके पदभार संभालते ही प्रशासनिक व्यवस्था में नई सक्रियता देखने को मिली.रोक्तिमा यादव कोरिया जिले की चौथी महिला कलेक्टर हैं, इससे पहले साल 2006 में जिले को पहली महिला कलेक्टर मिली थी।
प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता बरतने के निर्देश
पदभार ग्रहण करने के बाद कलेक्टर ने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और समयबद्धता बेहद जरूरी है.आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए.आपको बता दें कि पूर्व कलेक्टर चंदन त्रिपाठी का स्थानांतरण
बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के कलेक्टर पद पर किया गया है. उनका कोरिया जिले में लगभग 21 माह का कार्यकाल रहा. इस दौरान उन्होंने कई प्रशासनिक और विकास कार्यों को गति दी.अब जिले की जिम्मेदारी रोक्तिमा यादव को सौंपी गई है।
पदभार संभालने के बाद कलेक्टर रोक्तिमा यादव ने समय-सीमा की बैठक लेकर राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं की विभागवार समीक्षा की. बैठक में उन्होंने अधिकारियों से योजनाओं की प्रगति की विस्तृत जानकारी ली और लंबित कार्यों को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए. बैठक में राजस्व, खाद्य, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, मार्कफेड, सहकारिता, खनिज, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, अनुसूचित जाति एवं जनजाति, स्कूल शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, समाज कल्याण, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क, लोक निर्माण, जल संसाधन, कृषि, वन विभाग तथा नगरीय निकायों से जुड़े कार्यों की समीक्षा की गई।
जिन विभागों की प्रगति लक्ष्य से पीछे है, वे तेजी से कार्य करें और तय समय-सीमा के भीतर योजनाओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित करें. कलेक्टर ने जाति, निवास और अन्य प्रमाण पत्रों की उपलब्धता, एग्रीस्टेक पंजीयन, मनरेगा के तहत रोजगार, आधार अपडेट, आयुष्मान कार्ड, वय वंदन कार्ड और महतारी वंदन योजना के तहत ई-केवाईसी की प्रगति की जानकारी ली।
इसके अलावा प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना की समीक्षा करते हुए उन्होंने पात्र हितग्राहियों तक योजना का लाभ पहुंचाने पर जोर दिया. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि दूरस्थ ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले पात्र लोगों तक योजनाओं का लाभ प्राथमिकता से पहुंचे।
इससे पहले रोक्तिमा यादव कई विभागों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुकी हैं. उन्होंने कई जिलों में जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी यानी सीईओ के रूप में कार्य किया है. इसके अलावा कलेक्टर बनने से पहले वे समाज कल्याण विभाग में संचालक के पद पर अपनी सेवाएं दे चुकी हैं. प्रशासनिक कार्यों में उनकी सक्रियता और कार्यशैली को देखते हुए उन्हें एक अनुभवी अधिकारी माना जाता है।