रविवार, 18 अक्तू॰ 2026 हिंदी | EN
क्षेत्र

छत्तीसगढ़ में आदिवासी किसानों की नई उड़ान, जशपुर में 3500 एकड़ में नाशपाती-सेब की खेती

1.50 लाख तक प्रति एकड़ कमाई, बाजार दिल्ली तक

18 अक्तू॰ 2026 3 व्यू
छत्तीसगढ़ में आदिवासी किसानों की नई उड़ान, जशपुर में 3500 एकड़ में नाशपाती-सेब की खेती

रायपुर। छत्तीसगढ़ के जशपुर, बलरामपुर और सूरजपुर जिलों में कृषि विविधीकरण की एक नई तस्वीर उभरकर सामने आ रही है। पारंपरिक खेती से इतर, यहाँ के आदिवासी किसान अब काजू, आम, नाशपाती, लीची, अमरूद और सेब के बगीचे लगाकर अपनी आय में अभूतपूर्व बढ़ोतरी कर रहे हैं।

 

विशेषकर जशपुर जिले के पहाड़ी इलाकों में करीब 3,500 एकड़ जमीन पर लगभग 3,500 किसान नाशपाती की पैदावार कर रहे हैं। यहाँ सालाना 1.75 लाख क्विंटल नाशपाती का उत्पादन हो रहा है, जिससे किसान प्रति एकड़ 1 से 1.50 लाख रुपये तक की सालाना कमाई कर रहे हैं।

 

नाबार्ड (NABARD), रूरल एजुकेशन एंड डेवलपमेंट सोसाइटी (READS) और राज्य के उद्यानिकी विभाग के सहयोग से उत्पादित इन फलों को दिल्ली, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों के बाजारों तक पहुँचाया जा रहा है।

 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस पहल को आदिवासी समुदायों के लिए नए अवसरों का द्वार बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार उन्नत तकनीक, वैज्ञानिक खेती, सिंचाई सुविधाओं और बेहतर बाजार संपर्क के जरिए किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

 

जशपुर में फिलहाल लगभग 7,800 काजू किसान, 4,500 लीची किसान, 410 सेब किसान और 50 स्ट्रॉबेरी किसान बागवानी से जुड़े हैं।

 

इसके अलावा, राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन के तहत क्षेत्र में पाम ऑयल की खेती को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

 

जशपुर में निर्धारित 100 हेक्टेयर लक्ष्य में से करीब 43 हेक्टेयर में पाम ऑयल के पौधे लगाए जा चुके हैं।

 

बागवानी के इस सफल मॉडल को अब पड़ोसी जिलों में भी तेजी से विस्तार दिया जा रहा है। बलरामपुर जिले के शंकरगढ़ ब्लॉक में 1,000 किसान यूरोपीय प्रजाति की नाशपाती उगा रहे हैं, वहीं राजपुर ब्लॉक में 1,000 एकड़ क्षेत्र में आम और अमरूद के बाग विकसित किए गए हैं।

 

सूरजपुर जिले के प्रतापपुर ब्लॉक में भी नाबार्ड के 'वाड़ी' विकास कार्यक्रम के तहत 500 आदिवासी परिवारों को आम और अमरूद के फलदार पौधों से जोड़ा गया है, जिससे क्षेत्र में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई मजबूती मिल रही है।