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आग की तपिश से ज्यादा तकलीफदेह थी गर्मी में पानी की किलत अब आंगन में नल की धार बहती है

जल जीवन मिशन ने बदली अमलीपारा की तस्वीर, लोहार दम्पति सहित ग्रामीणों को अब ढोढ़ी से पानी लाने की मजबूरी नहीं

18 Sep 2026 0 views
आग की तपिश से ज्यादा तकलीफदेह थी गर्मी में पानी की किलत अब आंगन में  नल की धार बहती है

कोरबा जिले के कोरबा विकासखंड की दूरस्थ ग्राम पंचायत गिरारी के आश्रित ग्राम अमलीपारा में कभी गर्मी का मौसम आते ही पानी की चिंता सताने लगती थी। सूरज की तपिश बढ़ते ही गांव में पानी की किलत से जद्दोजहद शुरू हो जाती थी। घरों की जरूरत पूरी करने के लिए ग्रामीणों को ढोढ़ी से पानी लाना पड़ता था। महिलाओं के साथ पुरुषों और बच्चों को भी पानी जुटाने में अपना समय लगाना पड़ता था। पर अब अमलीपारा की तस्वीर बदल गई है। जल जीवन मिशन के तहत घर-घर नल कनेक्शन पहुंचने से अमलीपारा के ग्रामीणों के आंगन में नियमित रूप से पानी की धार पहुंच रही है।

गांव में रहने वाले लोहार दम्पति भारत लोहार और सुनीता लोहार इस बदलाव को अपने जीवन का बड़ा सुखद परिवर्तन मानते हैं। लोहे को गर्म कर उसे आकार और धार देने का काम करने वाले भारत लोहार के लिए आग की तपिश रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है। गर्मी के दिनों में दिनभर भट्ठी की आग के सामने बैठकर मेहनत करना उनके काम का हिस्सा है, लेकिन वे बताते हैं कि आग की लौ से कहीं अधिक तकलीफ उन्हें गर्मी के दिनों में पानी की कमी से होती थी।

भारत लोहार बताते हैं कि पहले गर्मी शुरू होते ही पानी की समस्या बढ़ जाती थी। घर की जरूरतों के लिए ढोढ़ी से पानी लाना पड़ता था। पानी लेने जाने में समय लगता था और कई बार काम छोड़कर पानी की व्यवस्था करनी पड़ती थी। इससे रोजी-रोटी का काम भी प्रभावित होता था। अब घर में ही नल से पानी मिलने लगा है, इसलिए पानी के लिए दूर जाने की जरूरत नहीं पड़ती।


सुनीता लोहार बताती हैं कि पहले गर्मी के मौसम में पानी जुटाना घर की सबसे बड़ी चिंता होती थी। सुबह और शाम पानी लाने में काफी समय निकल जाता था। परिवार के सभी सदस्यों को पानी की व्यवस्था में सहयोग करना पड़ता था। अब घर में ही नल कनेक्शन होने से पानी भरने के लिए कहीं बाहर नहीं जाना पड़ता। सुबह और शाम नियमित रूप से पानी मिलने से वे अपनी जरूरत के अनुसार पानी सुरक्षित रख लेती हैं और घरेलू काम भी आसानी से पूरे हो जाते हैं।

अमलीपारा के ग्रामीण बताते हैं कि बारिश और अन्य मौसम में पानी की समस्या उतनी गंभीर नहीं होती थी, लेकिन गर्मी आते ही ढोढ़ी पर निर्भरता बढ़ जाती थी। अब जल जीवन मिशन के तहत घर-घर नल कनेक्शन पहुंचने से वर्षों पुरानी समस्या काफी हद तक दूर हो गई है। घर के आंगन तक पानी पहुंचने से ग्रामीणों को न केवल राहत मिली है, बल्कि उनका समय और श्रम भी बच रहा है।

गांव के लोगों का कहना है कि घर तक पानी पहुंचने से सबसे बड़ा बदलाव महिलाओं के जीवन में आया है। पहले पानी लाने में घंटों समय और मेहनत लगता था, अब उसी समय का उपयोग घर-परिवार, बच्चों और अपने दूसरे जरूरी कार्यों के लिए किया जा सकता है। स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से ग्रामीणों में संतोष और सुरक्षा की भावना भी बढ़ी है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में जल जीवन मिशन के माध्यम से ग्रामीण परिवारों तक नल से जल पहुंचाने का अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में अमलीपारा जैसे दूरस्थ गांवों में भी घर-घर नल कनेक्शन पहुंचने से ग्रामीण जीवन में सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है। राज्य सरकार के प्रयासों से योजना का लाभ गांवों तक पहुंच रहा है और वर्षों से चली आ रही पेयजल की समस्या दूर हो रही है।

अमलीपारा की कहानी बताती है कि घर के आंगन तक पहुंची पानी की एक धार केवल प्यास नहीं बुझाती, बल्कि समय, श्रम और चिंता को भी कम करती है। कभी गर्मी आते ही पानी के लिए परेशान होने वाला लोहार दम्पति और गांव के अन्य परिवार अब अपने घर में नल से पानी की धार देखकर राहत महसूस कर रहे हैं। उनके लिए यह केवल नल कनेक्शन नहीं, बल्कि आसान और बेहतर जीवन की नई शुरुआत है।