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HC ने बंद की धान खरीद घोटाले से जुड़ी जनहित याचिकाएं, 415.7 करोड़ के घोटाले का आरोप था

07 सित॰ 2026 14 व्यू
HC ने बंद की धान खरीद घोटाले से जुड़ी जनहित याचिकाएं, 415.7 करोड़ के घोटाले का आरोप था

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने राज्य में 415.7 करोड़ रुपये के कथित धान खरीद घोटाले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करने वाली दो जनहित याचिकाओं को खारिज करते हुए मामला बंद कर दिया है।

 

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने इन याचिकाओं को इस आधार पर निरस्त कर दिया कि राज्य सरकार द्वारा नई धान खरीद नीति लागू किए जाने के बाद अब इस याचिका में उठाई गई मांग का कोई औचित्य नहीं रह गया है।

 

यह जनहित याचिका वर्ष 2022 में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं द्वारा दर्ज कराई गई थी, जब पार्टी राज्य में विपक्ष में थी। याचिकाकर्ताओं ने वर्ष 2018-19, 2019-20 और 2020-21 के धान खरीद सत्रों के दौरान फर्जी स्टॉक समायोजन और वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया था।

 

याचिका में दावा किया गया था कि 2018-19 में 5.38 करोड़ रुपये (3,067 मीट्रिक टन), 2019-20 में 79.54 करोड़ रुपये (43,656 मीट्रिक टन) और 2020-21 में 330.78 करोड़ रुपये (1,76,416 मीट्रिक टन) के धान की कमी हुई है। इसमें स्वतंत्र जांच, नुकसान की वसूली और जवाबदेही तय करने की मांग की गई थी।

 

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता अभिषेक चंद्र गुप्ता ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार द्वारा नई खरीद नीति लागू कर दिए जाने के कारण अब शिकायत का समाधान हो चुका है। राज्य सरकार और मार्कफेड के अधिवक्ताओं ने भी इसका समर्थन किया। अदालत ने कहा कि नई व्यवस्था के बाद राहत केवल सैद्धांतिक रह गई थी।