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छत्तीसगढ़ के मल्हार में लगभग 1,500 साल पुराना ताम्रपत्र मिला

28 अप्रैल 2026 40 व्यू
छत्तीसगढ़ के मल्हार में लगभग 1,500 साल पुराना ताम्रपत्र मिला

बिलासपुर। केंद्र सरकार के ज्ञान भारतम अभियान ने छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले की ऐतिहासिक नगरी मल्हार में अहम सफलता हासिल की है। यहां एक ताम्रपत्र प्राप्त हुआ है, जो छठी -सातवीं शताब्दी में दक्षिण कोसल (वर्तमान छत्तीसगढ़) में शासन करने वाले पांडु वंश से संबंधित है। इस ताम्रपत्र में राजा महाशिवगुप्त बालार्जुन (शासन काल 595-655 ईस्वी) द्वारा हैहयवंशी कलचुरी राजा जाज्वल्यदेव को एक गांव दान में देने का उल्लेख है। ऐसे में यह ताम्रपत्र लगभग 1,500 साल पुराना हो सकता है। बता दें कि हैहयवंशी कलचुरी वंश का शासन काल लगभग 550-1741 ईस्वी के मध्य माना जाता है।



100 साल पहले खेत में एक किसान को मिला था यह तामपत्र

 

संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित ज्ञान भारतम अभियान की विशेषज्ञ टीम को मल्हार में ताम्रपत्र के संरक्षण की जानकारी मिली। टीम ने मल्हार निवासी संजीव पांडेय के घर जाकर जानकारी प्राप्त की। संजीव ने बताया कि यह ताम्रपत्र सौ वर्ष पूर्व एक किसान को अपने खेत में मिला था, जिसे बाद में उनके दादा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी छेदीलाल पांडेय को सौंपा गया था।



साढ़े तीन किलो है वजन

 

संजीव ने बताया कि साढ़े तीन किलो वजनी इस ताम्रपत्र को उनके परिवार ने पुरातात्विक महत्व के कारण सुरक्षित रखा था। वर्ष 1975 में उज्जैन के पुरातत्ववेत्ता पद्मश्री डा. विष्णु श्रीधर ने बताया कि यह ताम्रपत्र ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा में लिखा गया है। राजा महाशिवगुप्त बालार्जुन दक्षिण कोसल के शक्तिशाली शासक थे, जिनकी राजधानी सिरपुर थी। यह ताम्रपत्र उनके द्वारा जारी किया गया है।



विशेषज्ञों का क्या कहना है?

 

विशेषज्ञों का मानना है कि यह ताम्रपत्र उस काल की सामाजिक संरचना और राजवंशों के संबंधों को समझने में महत्वपूर्ण है। टीम इसे वैज्ञानिक परीक्षण के लिए दिल्ली भेजने की तैयारी कर रही है। जिला प्रशासन भी इस बौद्धिक विरासत के दस्तावेजीकरण की योजना बना रहा है।